उद्धरण - 984

यह न कर सको तो अतीत में जाकर छिप जाओ। कणाद, पतंजलि, गौतम में अजन्ता, एलोरा, ऐलिफ़ेंटा में, कोणार्क और खजुराहों में, शाल-भंजिक-सुर-सुन्दरी-अलसकन्या के स्तनों में, जप-तप-मंन्त्र में, सन्त-समागम-ज्योतिष-सामुद्रिक में-जहाँ भी जगह मिले, जाकर छिप रहो। भागो, भागो, भागो। यथार्थ तुम्हारा पीछा कर रहा है।

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