उद्धरण - 972

लड़ना किसानों, मज़दूरों, व्यापारियों, भूतपूर्व ज़मींदारों आदि की ही बपौती नहीं, प्राणिमात्र का सहज गुण है। लड़ने की योग्यता इस पेशे या उस पेशे पर निर्भर नहीं है। अगर तुम लड़ने का नतीजा झेलने को तैयार हो तो तुम्हारी लड़ने की योग्यता पर बहस नहीं की जा सकती।

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