उद्धरण - 967

गुरु ने मंतर सिखा दिया था कि माफ़ करना सीख लो तो ग़ुस्सा नहीं आयेगा। सबको माफ़ कर देना चाहिए सिवा ख़ुद के। गुरु जी ने बताया ख़ुद को कभी क्षमा नहीं करना चाहिए, अपने को कठोर से कठोर सज़ा दो। अपने को सज़ा देने से बेहतर होता है प्रायश्चित कर लेना। दूसरी बात, हमेशा माफ़ करने में ही बड़प्पन नहीं होता है कभी कभी माफ़ी मांगना ज़्यादा बड़ी बात होती है।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549