उद्धरण - 948

ब्राह्मण उम्मीदवार ने सवर्णों के बीच ऋग्वेद के पुरूष-सूक्त का कई बार पाठ किया और समझाया कि ब्राह्मण ही पुरूष-ब्रह्म का मुँह है। उसने यह भी बताया कि शूद्र पुरूष-ब्रह्म का पैर है। प्रधान के पद के बारे में उसने कई उदाहरण देकर बताया कि उसका सम्बन्ध मेधा और वाणी से है जो पैर में नहीं होती, सिर में होती है, जिसमें मुँह भी होता है। अतः ब्राह्मण को स्वाभाविक रूप से प्रधान बनना चाहिए, न कि शूद्र को।

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