उद्धरण - 942
कि वह ही नहीं उसका पूरा परिवार डिप्रेशन का मरीज़ है। उसका छोटा भाई ट्रेन से सफ़र नहीं करता। क्योंकि तब पूरी यात्रा ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की फ़िल्में उसके दिमाग़ में चलने लगती है। पिता ने पच्चीस वर्षो से घर के बाहर का बना भोजन नहीं किया। उन्हें लगता है कि किसी ने ज़हर मिला दिया हो। वह रोज़ बीस बीड़ा पान खाते हैं किंतु दुकान पर नहीं स्वयं अपने हाथ से चूना, कत्था, सुपारी, तमाकू डाल कर। बड़े भाई कभी अकेले नहीं सोते, कभी सो भी गये तो पंखा नहीं चलायेंगे। उन्हें हमेशा पंखे के या छत पर रेंग रही छिपकली के गिर जाने का ख़तरा महसूस होता रहता है, अकसर सोते समय घर में सर्किट से आग लग जाने के ख़्याल से जाग जाते हैं।
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