उद्धरण - 934
क्योंकि जीवन और अशान्ति एक ही क्रिया के दो नाम हैं। शान्ति तो उस तूफान के पहले होती थी - जब वह बिल्कुल ही निर्लिप्त, बिल्कुल निरीह, एक गतिमान अचेतन- सा हो जाता था।
मरणासन्न मानव का मानसिक जीवन पहले से अधिक गतिमान हो जाता है, किन्तु मानव आजीवन उसी तल पर नहीं रह सकता...
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