उद्धरण - 930
उनमें कई शोहदे थे, कई मनोविकारग्रस्त, कई सच्चे आशिक़ थे। चाचा सच्चे आशिक़ थे वह पास से बलवंत कौर के गुज़र जाने पर ख़मोश उसके पीछे पीछे साइकिल घसीटते हुए चलते रहते थे। बलवंत की चाल धीमी होती चाचा की चाल धीमी हो जातीं। वह तेज़ चलने लगती चाचा भी तेज़ चलने लगते। वह रुकी चाचा रुके।
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