उद्धरण - 929

गौरा, कोई किसी के जीवन का निर्देशन करे, यह मैं सदा से गलत मानता आया हूँ। तुम जानती हो! दिशा-निर्देशन भीतर का आलोक ही कर सकता है, तुम्हें जो राह दिखती है, उस पर चलो गौरा।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549