उद्धरण - 925
मेरे मन में एक विचित्र भाव उठता है। चाँद एक कन्या है और यह पृथ्वी का काला सौन्दर्य उसका आवरण। किन्तु चाँद इतना सुन्दर है कि इस आवरण को उसे ढँक रखने का अधिकार नहीं है। इसलिए चाँद ने उसे उतार फेंका है और निरावरण होकर क्षितिज से ऊपर आ गया है।
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