उद्धरण - 924

कीड़े-मकोड़े और भुनगे, मक्खियाँ और मच्छर-परिवार-नियोजन की उलझनों से उन्मुक्त-वहाँ करोड़ों की संख्या में पनप रहे थे और हमें सबक़ दे रहे थे कि अगर हम उन्हीं की तरह रहना सीख लें तो देश की बढ़ती हुई आबादी हमारे लिए समस्या नहीं रह जाएगी।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549