उद्धरण - 922
.....मानों पूरा दृश्य अजायब घर के कॉच के शो-केश में रखा हुआ एक मॉडल हो। केवल पहाड़ उभरकर बड़े भारी और तीखे हो जाते हैं, जैसे आकाश के तेवर चढ़ गए हों,....... यह अलसाना भाव ही पहाड़ के शरदारम्भ का पहला और सबसे प्रीतिकर चिन्ह होता है- सबसे प्रीतिकर भी, लेकिन साथ ही एक विशेष प्रकार की व्याकुलता लिए हुए.....उस व्याकुलता को रेखा नाम देना नहीं चाहती, नाम देना आवश्यक भी नहीं है, क्योंकि धमनियों में उसकी अकुलाहट के साथ मन में जो विचार या वांछा चित्र उठते हैं, वे अपने आपमें सम्पूर्ण होते हैं।
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