उद्धरण - 921

अपना ज्ञान प्रकट कर देंगे, तो बेकार संसार के चक्कर में पड़ेगे। कोई मान देगा, तो अहंकार होगा। कोई अपमान करेगा, तो अहंकार को कष्ट होगा। इससे अच्छा है कि पागल की तरह रहा जाए। पागल से न कोई उम्मीद करता है, न कोई उसकी बात का बुरा मानता है। जो पागल नहीं है उसे हर समय सतर्क रहना पड़ता है कि वह जो बोल रहा है, उसका क्या असर होगा। पागल आदमी अपनी मौज में रह सकता है। न किसी का डर, न कोई खटका।

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