उद्धरण - 920

परिधियाँ, बन्धन, बहुत व्यक्तियों को अधोगामी बनाते हैं, किन्तु कुछ ऐसे भी होते हैं, जो उसकी स्फूर्तिदायिनी उत्तेजना के बिना जी ही नहीं सकते ...

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