उद्धरण - 916
उनका वेतन कई महीनों से स्थगित था। क्योंकि वह केस नहीं ला सके थे। केस नसबंदी कराने वाले का कहते थे। आपातकाल में सरकार का सबसे केन्द्रीय कार्यक्रम था-परिवार नियोजन। इसके लिए हर जनपद हर तहसील में नसबंदी की ज़ोराज़ोरी थी। प्रत्येक सरकारी मुलाज़िम के लिए नसंबदी का केस लाने का फ़रमान था। यदि वह अपने कोटे के केस नहीं ला पाता था तो उसकी तनख़्वाह रोक दी जाती थी।
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