उद्धरण - 913
जो एक बार अपनी इच्छा से पतित होता है, उसका उत्थान होना असम्भव है । कोई उसका मित्र नहीं होता, कोई उसकी सहायता नहीं करता । मेरे लिए यही जीवन है-- यही जिसे एक दिन मैंने इतनी व्यग्रता से अपनाया था, और जिसने आज साँप की तरह मुझे अपने पाश में बाँध लिया है!
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