उद्धरण - 905

जो युद्धमुख से भागता है, अपनी पराजय से भागता है, उसके लिए कदम-कदम पर और युद्ध है, और पराजय है, जब तक कि वह जान न ले कि अब और भागना नहीं है, टिककर लड़ने न लगे...जीवन से भागना? आगे और जीवन है, जीवन तो रुक नहीं सकता, उसका तो विस्तार समाप्त नहीं हो सकता....

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