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‘डायरेक्ट एक्शन डे‘ के दिन दोपहर को मुसलमानों की एक बड़ी रैली ‘ऑक्टरलोनी मोन्यूमेंट‘ के पास सारे शहर के विभिन्न भागों से आकर होनेवाली थी। सरदार पटेल ने अपनी निर्मल शैली में इस घटना का उपसंहार इन शब्दों में किया - ”इसमें हिंदुओं का पलड़ा भारी रहा।” इस दंगे की अवधि एक साल से अधिक दिनों तक जाती है, जिसमें कलकत्ता में लगातार खून-खराबा होता रहा। सोलह अगस्त का ही परिणाम नोआखली और बिहार के दंगे थे। इस दंगे को इतिहास में द ग्रेट कैलकटा किंलिग के नाम से जाना जाता है। इसी ‘किंलिग‘ ने देश और बंगाल के विभाजन पर एक तरह से मुहर लगा दी।

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