उद्धरण - 887

असल में सब सिद्धान्त क्षतिपूरक होते हैं- आप जो हैं, जैसे हैं, उस से ठीक उल्टा सिद्धान्त गढ़ कर उस का प्रचार करते फिरते हैं। इस से एक तो आप अपने लिए एक सन्तुलन स्थापित कर लेते हैं, दूसरे औरों को गलत लीक पर ढाल देते हैं ताकि आप को ठीक-ठीक कोई पकड़ न पा सके।

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