उद्धरण - 877

उनका मौन उनकी व्यथा को धर दे देगा, जिस पर मैं हर समय कटती रहूँगी.....मैं अपना युद्ध लड़ सकती हूँ, पर मुझे क्या अधिकार है, मैं उनसे अपना युद्ध लड़वाऊँ?......और अगर किसी को मूक होकर जलना ही है, तो वह कोई मैं ही क्यों नहीं होऊँ?

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