उद्धरण - 870

आप हमारे दुख में आकर मिल गए, हमें उसमें सांत्वना भी मिली, पर आपका कर्तव्य क्या वहीं तक था? दुख सब जगह है। आप उसे एक ही जगह समझ कर उसकी छाया में रहना चाहते हैं, और आपका जो काम है, उसमें अनिच्छा दिखा रहे हैं। आप कालेज जाइए

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