उद्धरण - 863

हम लोग तकल्लुफ नहीं चाहते-आदमी-आदमी के सीधे सम्बन्ध में वह विघ्न है। हम इन्सान को इन्सान कहकर जानना चाहते हैं, समाज के लिपे-पुते ‘स्केयर क्रो’ (डरौना) के रूप में नहीं।

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