उद्धरण - 860

ये सूर्यकांत अपनी नवब्याहता को लेकर जहां अपने कमरे पर जायेगा वह कमरा गंदगी से अधमरा होगा। वह युद्धभूमि की तरह होगा जहां कपड़े एंव किताबें रणभूमि में शवों, घायलों और नरमुंडों की तरह इधर उधर बिखरी पड़ी होंगी। सिगरेट के टुकड़ों से भरे हुए गिलास इस प्रकार लग रहें होंगे जैसे पराजित सेना के बंदी योद्धाओं की उंगलियां काट कर इन बरतनों में ठूंस ठूंस कर रख दी गयी हों।

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