उद्धरण - 851

रोज सूर्योदय से पहले उठना। एक घंटे तारों की छांव के नीचे चलते हुए धीरे-धीरे होती उजास को देखते हुए उगते सूर्य को देखना। ‘दस मिनट शांत हो कर ध्यान‘। किसका ?- किसी का भी किसी ईश्वर के चित्र या ऊँ ध्वनि का। या अपने ही अंदर चलते रक्त प्रवाह के अनवरत संगीत का। चिड़ियों के कलरव का। गंगा के प्रवाह का। जिससे भी मन प्रसन्नता का अनुभव करे। टिके। ‘दो मिनट प्रार्थना‘। धन्यवाद-परक प्रार्थना। किस चीज का धन्यवाद। किस चीज की कृतज्ञता ? और किसके प्रति ?- जो भी अच्छा लगा था, लग रहा है, उसके स्रोत को धन्यवाद। ईश्वर है तो ठीक, नहीं तो प्रकृति, स्वयं अपने आप को। यही अहोभाव है। प्रार्थना कोई मांग नहीं -तन-मन-धन, परिवार किसी के लिए मांगना नहीं।

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