उद्धरण - 842

मैंने चाहा था, तुम मुझे हँसता ही देखो- संसार मुझे हँसता ही देखे, पर ऐसे भी दर्द होते हैं, जो अभिमान से भी बडे़ हों। यही मैं आज सीख रहा हूँ- अच्छा हुआ कि इतना तीखा दर्द मुझे मिला! जाओ।

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