उद्धरण - 838

भुवन, मर्द के आँसू मैंने पहले भी देखे हैं। बड़ी व्यथा के आँसू- इसलिए कि उस पुरूष ने मुझे खो दिया है। बड़ी ग्लानि के आँसू- इसलिए कि वह पुरूष मुझे पा लेना चाहता है और पा नहीं सकता। पर तुम्हारे आँसू- किसी पर छाँह करते हुए उस के लिए रोना नामर्दी नहीं है, भुवन....

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