उद्धरण - 834

इतना अनुमान उसका अवश्य है कि उस दिन उसके भीतर जो जिज्ञासु असुर जागा था, उसके लिए कुछ भी असम्भव नहीं था, कुछ भी जघन्य नहीं था, कुछ भी नीतिभ्रष्ट नहीं था, क्योंकि वह असुर जघन्य और अनुकरणीय नीति और अनीति के विचार से, विचार-शक्ति मात्र से, कहीं अधिक पुराना था.....

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549