उद्धरण - 832

उस पेंटिंग में एक गांव था। जैसाकि गांव में होना चाहिए था : मिट्टी के घर, फूस की झोपाड़ियां, वृक्ष, मवेशी, तालाब, फ़सल भरे खेत, खलिहान आदि पेंटिंग के गांव में थे। खेतों में ख़ूब फ़सलें थी, पेड़ों पर ख़ूब फल थे, स्वस्थ तगड़े मवेशी थे और प्रसन्नचित मनुष्य थे। एक कुएं की जगत पर पानी भरती हुई स्त्री थी। इस पेंटिंग में विशेष यह था : सब बारिश के भीतर था। सांवरे बादलों से झमाझम बारिश हो रही थी।

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