उद्धरण - 831
मैं नहीं सोच सकता कि मैं कैसे किसी भी प्रकार की हिंसा कर सकता हूँ, या उस में योग दे सकता हूँ- पर अगर कोई काम मैं आवश्यक मानता हूँ, तो कैसे उसे इसलिए दूसरों पर छोड़ दूँ कि मेरे लिए वह घृण्य है? मुझे मानना चाहिए कि वह सभी के लिए- सभी सभ्य लोगों के लिए- एक-सा घृण्य है, और इसलिए सभी का समान कर्तव्य है.....
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