उद्धरण - 825
पांडे जी अपने पुरखों के लिए आपकी इतनी तड़प देख कर मुझे बहुत ख़शी हुई है। आज जब पुरखों को भुला देने में, हर समस्या के लिए उन्हें गुनहगार साबित करने में अपनी शान मानी जा रही है तब आप इतनी दूर से इस देश में आये हैं अपने बाबा के गांव की खोज में- ये बड़ी बात है।
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