उद्धरण - 824
कि अतीत के प्रति कोई बहुत बड़ी ग्रीवेंस होती तो वह भी कुछ बात होती- उसी की कडुवाहट एक सहारा हो जाती, एक उत्पीड़ित मसीहा की तरह मैं चल निकलता। बहुत से लोग इस उत्पीड़न के आक्रोश के सहारे ही जीते हैं- उस में से बड़े-बड़े जीवन-सिद्धान्त भी निकलते हैं और दूसरों का उत्पीड़न करने का जस्टिफिकेशन भी।
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