उद्धरण - 821
‘इसमें समझने की क्या बात है? ऐसा कौन है जो जीवन में सिक्योर होना नहीं चाहता? नहीं तो यह बीमा, प्राविडेण्ट फण्ड, पेंशन आदि का रिवाज ही कैसे होता? आजकल तो कोई नौकरी करता है, तो पहले पूछता है कि पेंशन का प्राविडेण्ट फण्ड है या नहीं। क्यों, मेरी बात ठीक नहीं है?’
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