उद्धरण - 813

शेखर ने देखा, उसके संसार के अलावा एक और संसार है, जिसमें पक्षी रहते हैं, जिसमें स्वच्छन्दता है, जिसमें विश्वास है, जिसमें स्नेह है, जिसमें सोचने की या खेलने की अबाध् स्वतंत्रता है, जिसका एकमात्र नियम है, ‘वही होओ जो कि तुम हो’.......

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549