उद्धरण - 810
रोज सुबह होता है, सूरज निकलता है, हम आदी हो जाते हैं और मान लेते हैं कि न केवल सूरज कल निकलेगा बल्कि हम भी उसे कल देखेंगे। प्रकृति का स्थायित्व देख कर ही मानव अपने लिए स्थायित्व माँगता है, प्रकृति के रूपान्तर देख कर ही वह अपने रूपान्तरों की कल्पना करता है या उन के द्वारा अमरत्व की आशा.....
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