उद्धरण - 808
राजा में ईश्वर का अंश होता है, ऐसे अन्ध-विश्वास पालने वाली अहोम जाति के लिए यह मानना स्वाभाविक ही था कि राजकुल का अक्षत-शरीर व्यक्ति ही राजा हो सकता है, जिसके शरीर में कोई क्षत है, उसमें देवत्व का अंश कैसे रह सकता है? देवत्व-और क्षुण्ण? नहीं । ईश्वरत्व अक्षुण्ण ही होता है, और राज-शरीर अक्षत......
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