उद्धरण - 807

घर-गिरस्ती बनाओ, चार पैसे कमाओ, अलग निश्चिन्त होकर रहो। बहू अच्छे घर की होगी तो थोड़े में भी काम चला लेगी, बल्कि आधी गिरस्ती तो बहू के साथ आती है। और मैंने कुछ जोड़ा तो है नहीं, जो कुछ होता रहा है, तुम लोगों पर खर्च कर दिया है, पर फिर भी जो कुछ बन पड़ेगा, कर ही दूंगा।

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