उद्धरण - 806

इस तरह का नैतिक अविश्वास उसने अब तक जाना ही नहीं, पाप उसने बहुत जगह देखा है, किया भी है, लेकिन पाप ही मानव की हरेक प्रेरणा का मूल है, ऐसा भयानक सन्देह, ऐसा असन्दिग्ध् अविश्वास-वह अपने हृदय में नहीं जमा सका है।

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