उद्धरण - 804
बाबा के चेहरे पर ऐसी ज्योति जली जो उनके जीवन में पहली और अंतिम बार देखी गयी थी। बाबा बुदबुदाये-“गोसाईंगंज।“ बाबा के चेहरे की ज्योति क्षणिक साबित हुई। वह बुलबुले की तरह निर्मित होकर विलीन हो गयी थी। इसी के बाद उनकी आंखें जैसे अंधकार का कोटर बन गयीं और अपने मुलुक की शिनाख़्त कराने वाला दूसरा कोई लफ़्ज उनकी ज़बान से न निकला।
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