उद्धरण - 802
अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक कलकत्ता फोर्ट विलियम अढ़ाई सौ एकड़ के फैलाव के अंदर यूरोपियनों, आरमेनियनों और पुर्तगाली क्रिश्चियनों के रहने का घिरा हुआ स्थान बन गया था, जिसे ‘गोरे शहर‘ के रूप में जाना जाता था। इसके बाहर नदी के मुहाने से करीब साढ़े तीन मील उत्तर तक ‘नेटिव‘ या ‘काला शहर‘ बसा था और इन दोनों भागों को घेरती हुई ‘मराठा खाई‘ थी जो मराठों के आक्रमण से कलकत्ते को बचाने के लिए बनाई गई थी।
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