उद्धरण - 790

संसार में सच की परख उसके उद्देश्य के आधार पर नहीं की जाती है। सत्य स्वंय में कसौटी है। किंतु झूठ का मूल्याकंन उसके प्रयोग के पीछे निहित मंतव्य के आधार पर होता है। झूठ का इरादा यदि भला, करुणामय या परहित है तो सत्य जैसा दर्जा हासिल कर लेता है।

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