उद्धरण - 781

अब लगता है जीवन तो वहीं था। उसके बाद तो सिर्फ जीवन की लाश ढोई है अब तक। बेहोशी में सारा जीवन कट गया। ऐसे लगता है महज एक धुंधलापन हो उन बीच के सालों में। जब से बाइपास सर्जरी हुई है, तबसे फिर न जाने कैसे उन्हीं पुराने दिनों में लौट आया हूँ।

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