उद्धरण - 772
समाज का मैं अंग हूँ, उसके प्रति मेरी जवाबदेही है, पर उसकी मैं उपेक्षा कर सकती हूँ, क्योंकि वह मेरे प्रति कर्तव्यशील नहीं है और फिर उसके आदर्श बदलते रहते हैं और रहेंगे। पर माँ- माँ तो सनातन है, सदा माँ है, उसके प्रति भी तो मेरा कर्तव्य है...... माँ विधवा है, फिर उसके अपने संस्कार हैं।
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