उद्धरण - 771

उसके विश्वासी हृदय ने कुमार को अपना भाई मान लिया था- वह अकल्पनीय भाई जो उसे घर में नहीं मिला था, और उसका स्थान बहिनें किसी प्रकार भी नहीं भर सकती थीं।

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