उद्धरण - 769

ऐसा भी नहीं था कि वर्णाश्रम व्यवस्था में ऊंचे पायदान पर पहुंचने की कोई आकांक्षा थी उनके मन में क्योंकि वर्णाश्रम में यह कभी संभव ही नहीं था और न किसी के भीतर ऐसी हसरत पैदा होने की गुंजाइश थी यह भी सही नहीं होगा कि बाबा के अंदर झूठ बोलने की लत थी क्योंकि उनके जैसे सामाजिक स्तर के इन्सान सार्वजनिक रुप से झूठ बोलने की हिम्मत दिखाने की औक़ात ही नहीं रखते थे।

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