उद्धरण - 766

ऐसे ही होते हैं डॉक्टर, सरकारी अस्पताल है न, क्या परवाह है। मैं तो रोज ही ऐसी बातें सुनती हूँ! अब कोई मर-मुर जाए तो ख़्याल ही नहीं होता। पहले तो रात-रात भर नींद नहीं आया करती थी।

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