उद्धरण - 765

जहाँ नगर की सड़ाँध रहती है, वहाँ वह रहती थी। अधेड़ अवस्था की वेश्याएँ, बेकार मजदूर, पेशेवर भिखमंगे, कानून की आँख और चंगुल से बचकर छिपे-उधड़े काम करने वाले उचक्के लोगों के रहने की वह जगह थी।

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