उद्धरण - 761
वह दुकान वाले से बोला-“इन्हें भरपेट खिला दो।
उन सातों के लिए यह वर्तमान इतना अविश्वसनीय, सुखद, अलौकिक लग रहा था कि वे जड़ हो गये थे। शायद वे इसे सपना समझ रहे थे कि जैसे ही पूड़ी का कौर मुंह में डालेंगे, नींद खुल जायेगी। किंतु वह सपना नहीं यथार्थ था जो अराकारी के कारोबार से जुड़ा था।
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