उद्धरण - 755

लोग प्रायः भूल ही जाते हैं कि उनके जीवन क्या रहे। तभी समाज अपने लिए यह सम्भव पाता है कि विधान करे, योग्य माता-पिता वे हैं, जो बच्चों को वयः प्राप्त लोगों की तरह रहना सिखायें।’ इस एक भावना ने यौवन का जितना अपघात किया है, उतना शायद ही किसी और कानून या प्रथा या विधान ने किया हो।

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