उद्धरण - 752
स्वाधीनता केवल सामाजिक गुण नहीं है। वह एक दृष्टिकोण है, व्यक्ति के मानस की एक प्रवृत्ति है। हम कहते हैं कि समाज हमे स्वाधीनता नहीं देता, पर समाज दे कैसे? हमीं तो अपने दृष्टिकोण से समाज बनाते हैं। मैं अपने-आपको बद्ध नहीं मानती हूँ, और स्वाधीनता के लिए अपने मन को ट्रेन करती हूँ। सफलता की बात नहीं जानती, उतनी शक्ति मेरे भीतर होगी तो क्यों नहीं होऊंगी सफल? और मैं सोचती हूँ कि सब लोग बलपूर्वक अपने को स्वाधीनता के लिए ट्रेन करें तो शायद हमारा समाज भी स्वाधीन हो सके।
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