उद्धरण - 751
उसमें लिखा था कि जब से कलकत्ता बना, तभी से यहां वेश्याओं की भरमार थी। डेढ़ सौ साल पहले वेश्याओं की बड़ी-बड़ी कोठियां हुआ करती थीं जिनमें पचास-पचास कमरे तक हुआ करते थे। कलकत्ता हमेशा बाहर से आकर व्यापार करने वालों का शहर रहा है। इसलिए यूरोपियन वेश्याओं से लेकर बड़ी-बड़ी नामी मुस्लिम वेश्याएं और बनारस की वेश्याएं यहां हुईं जिनके पास भारी धन- जायदाद हुआ करती थी। पूरे-के-पूरे इलाके वेश्याओं के इलाके कहलाते थे।
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