उद्धरण - 750
जब विवाह हुआ था तब दोनों जानते थे कि दोनों का पहले अन्यत्र लगाव रहा है जो मिटा नहीं है, लेकिन जिसका कोई रास्ता भी नहीं है। एक विवाहित व्यक्ति था, और पति-पत्नी दोनों ही सुधा के भी और हेमन्त के भी घने मित्र थे....वह परिवार न टूटे, यह भी सबके ध्यान में था, और विवाह हुआ तब जैसे यह भी एक बात पीछे कहीं पर थी कि सभ्य समाज में अगर ऐसी उलझनें पैदा होती हैं, तो सभ्य व्यक्ति उनका सामना भी सभ्य तरीकों से कर सकता है; प्यार जहाँ है वहाँ हो, और विवाह.....विवाह जो सामाजिक बन्धन है, व्यक्ति के जीवन में यह बाधक ही हो, ऐसा क्यों?
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